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दलालों के माध्यम से प्री मेडकल में अनफिट कैंडिडेट से मोटी रकम वसूल कर Unfit से Fit की रिपोर्ट देने का खेल का भंडाफोड़

संपादक शिराज़-ए-हिन्द,राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र की एक ख़ास रिपोर्ट

खाड़ी देशों में रोज़गार का सपना और भारत में मज़दूरों का शोषण मेडिकल, स्किल टेस्ट और VFS प्रक्रिया में कथित अवैध वसूली का गंभीर मामलो का हुआ पर्दाफाश

लखनऊ / दिल्ली | विशेष रिपोर्ट खाड़ी देशों में रोज़गार पाने की उम्मीद लेकर जाने वाले अधिकतर लोग गरीब और मेहनतकश तबके से आते हैं।ये वही लोग होते हैं जो अपने बच्चों की पढ़ाई, परिवार की ज़रूरतें और बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाने का सपना देखते हैं।लेकिन हकीकत यह है कि भारत में ही उनके सपनों का सौदा शुरू हो जाता है।मेडिकल जाँच के नाम पर खुली लूट, प्राप्त जानकारियों और प्रूफ के अनुसार जहाँ सामान्य रूप से मेडिकल जाँच की सरकारी फीस लगभग ₹6,500 होती है,वहीं कई निजी मेडिकल सेंटर्स में जानबूझकर उम्मीदवारों को Unfit घोषित कर दिया जाता है।दोबारा फिट करने के नाम पर मेडिकल सेंटर पर दलाल सक्रिय है दलालों के माध्यम से Unfit रिपोर्ट को Fit कराने के नाम पर ₹25,000 से ₹35,000 तक की वसूली कर Unfit रिपोर्ट को Fit करने का मामला प्रूफ के साथ प्रकाश में आया है ! आपको बताता चलू कि कई मामलों में पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति को सिर्फ़ इसलिए अनफिट किया जाता है ताकि उससे पैसे ऐंठे जा सकें।

स्किल टेस्ट भी बन चुका है कमाई का ज़रिया खाड़ी देशों के लिए ज़रूरी Skill Test अब योग्यता का नहीं, बल्कि पैसों का खेल बनता जा रहा है।Unfit व्यक्तियों को Fit कराने के नाम पर ₹25,000 से ₹35,000 की अवैध मांग बिना पैसे के बार-बार फेल दलालों के ज़रिए सेटिंग मेहनती मज़दूरों को जानबूझकर रोका जाना यह सब एक संगठित तरीके से किया जा रहा है। VFS सेंटरों पर भी उठ रहे सवाल लखनऊ और दिल्ली के VFS केंद्रों को लेकर भी कई शिकायतें सामने आई थी जिसको गंभीरता से लिया गया और शिकायत के आधार पर सच्चाई जानने के लिए न्यूज टीम के द्वारा स्ट्रिंग ऑपरेशन कर सच्चाई जानने के लिए एक 8 सदस्यीय टीम गठित कर पहले प्री मेडिकल कराया गया जहां अनफिट की रिपोर्ट प्राप्त हुई ,अनफिट की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही न्यूज टीम ने मेडिकल के सारे रुल को फ़ालों करते हुए दिल्ली, लखनऊ में स्थिति अथिराएज सेंटरों से मेडिकल करवाया गया जिसमें पूर्व में कराए गए प्री मेडिकल कि रिपोर्ट में Unfit की रिपोर्ट दी गई जब कि रिपोर्ट अथिराएज सेंटरों से दलालों की साठ गांठ से Unfit रिपोर्ट को Fit कराने के लिए अथिराएज मेडिकल सेंटरों ने दलाल के माध्यम से न्यूज टीम द्वारा गठित टीम में Unfit हुए रिपोर्टर ने अथिराएज मेडिकल सेंटर के एक दलाल से UNFIT होने की बात बताया वही दलाल ने न्यूज टीम के स्ट्रिंग कर रहे रिपोर्टर से Unfit रिपोर्ट को Fit रिपोर्ट कराने के लिए 50 हजार की डिमांड की सौदा 40000 रूपए में तय हुआ दलाल ने रिपोर्टर की Unfit रिपोर्ट को Fit रिपोर्ट में बदल कर दे दी जो आज भी सुरक्षित है ! यहां यह कहना गलत नहीं है कि जिस रिपोर्टर की अनफिट मेडिकल रिपोर्ट को पैसे लेकर Fit करके दिया गया है उसे आज भी जाँच कराई जाय तो आज भी अथिराएज मेडिकल सेंटर से मिली Fit की रिपोर्ट Unfit ही प्राप्त होगी न्यूज टीम ने सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी एवं गरीब जनता के आधार पर स्ट्रिंग ऑपरेशन किया तो ग़रीब जनता के द्वारा की गई शिकायत प्रूफ के साथ सत्य साबित हुई जहां पैसे लेकर Unfit रिपोर्ट को Fit करने का अवैध कारनामे संचालित पाया गया ! यही एक तरफ बायोमेट्रिक के नाम पर अनावश्यक फाइल में कमी बताकर परेशान करना“जल्दी काम कराने” के नाम पर अतिरिक्त पैसा गरीब मजदूरों पर मानसिक दबाव मजदूर मजबूरी में पैसे देता है, क्योंकि उसका वीज़ा, नौकरी और भविष्य इसी पर टिका होता है।

जाने क्या है गरीब मजदूरों का दर्द एक मजदूर पर कुल बोझ:

₹1,25,000 तक पूरी प्रक्रिया को जोड़ें तो एक साधारण मज़दूर पर लगभग यह खर्च आता है: मदअनुमानित खर्च मेडिकल ₹25,000 – ₹35,000 स्किल टेस्ट ₹10000 se 15000 VFS प्रक्रिया ₹1000 – ₹15,00एजेंट / दलाल ₹50,000 – ₹70,000 कुल ₹1,00,000 – ₹1,25,000 यह पूरी रकम ज़्यादातर लोग कर्ज़ लेकर चुकाते हैं —ग़रीब जनता अपने परिवार की रोज़ी रोटी चलाने के लिए खाड़ी देश जाने के लिए सूद पर पैसा, ज़मीन गिरवी, या गहने बेचकर इंतज़ाम करती है ! वहीं एक तरफ अथिराएज मेडिकल सेंटरों द्वारा फिट मेडिकल को अनफिट और अनफिट मेडिकल को फिट रिपोर्ट देकर दलालों के माध्यम से इन्लीगल कार्य करते हुए मीडिया द्वारा बिछाये जाल में फंस चुके है, जहां गरीबों से सौदा कर गरीबों से लिए अवैध तरीको से लिए गए पैसों से अपनी तिजोरियों को भर रहे है !वहीं सपनों से कर्ज़ के जाल तक जो मज़दूर अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी देना चाहता है,वही आदमी विदेश पहुँचने से पहले ही मेडिकल सेंटरों के द्वारा किये जाने वाले कृत्य से कर्ज़ के जाल में फँसता चला जाता है। कम तनख़्वाह, महँगा खर्च और भारत का कर्ज़ नतीजा यह कि उसकी ज़िंदगी सिर्फ़ कर्ज़ उतारने में बीत जाती है! अब सवाल यह उठता है क्या मेडिकल और VFS सिस्टम की निगरानी नहीं होनी चाहिए ? क्या दलालों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? क्या मेहनतकश का सपना सिर्फ़ कमाई का ज़रिया बनकर रह गया है? निष्कर्ष खाड़ी जाने वाला मज़दूर अपराधी नहीं है,वह सिर्फ़ अपने परिवार के लिए रोज़ी कमाना चाहता है। अगर समय रहते इस पूरे सिस्टम पर लगाम लगाने के साथ ही अथिराएज मेडिकल सेंटरों द्वारा दलालों के माध्यम से फिट मेडिकल को अनफिट और अनफिट मेडिकल को फिट रिपोर्ट देने वाले का लाइसेंस निरस्त होना चाहिए जिससे खाड़ी देश जाने वाले ग़रीब पर हो रहे शोषण को रोका जा सके ,अगर अथिराएज मेडिकल सेंटरों पर कार्यवाही नहीं हुई तो अथिराएज मेडिकल सेंटरों का हौसला और भी बुलंद होता जाएगा और सबसे ज़्यादा नुकसान गरीब और मजबूर इंसान का होगा और हमारे देश का सर खाड़ी देश की नज़र में झुक जाएगा समय रहते ही अगर इन मेडिकल सेंटरों पर कार्यवाही नहीं हुई तो आने वाले समय में हमारे देश की वर्तमान सरकार का सर अन्य देशों के आगे शर्म से झुक जाएगा !

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